Inspiration: गाजीपुर के चोचकपुर गांव का ये शिल्पकार किसी को भी अचंभित कर सकता है. ये दोनों आंखें से देख नहीं सकते पर बहुत ही सुंदर और साफ लकड़ी की बास्केट बनाते हैं. इसे दऊरा कहते हैं जिसे छठ पूजा में इस्तेमाल किया जाता है. Post navigation कौन हैं यहूदी ट्रांसजेंडर ईशा बेंजामिन, जो किन्नर अखाड़े में बनेंगी महंत यहां के पनीर डोसे का है जलवा, स्वाद ऐसा कि उंगलिया चाट जाते हैं लोग