इस मंदिर में पिछले 15 सालों से अखंड ज्योति जल रही है. सुबह और शाम की आरती में इतनी भीड़ होती है कि मंदिर में पैर रखने की भी जगह नहीं मिलती. Post navigation विंध्यवासिनी धाम -अष्टभुजा और कालीखोह को मिलाकर बनेगा शक्तिपीठ सर्किट यहां मिलता है सबसे मशहूर दही फुल्की, स्वाद चखने के लिए लगाता है लोगों का तांता