पूरा मामला जिले के दोस्तपुर के एक गांव का है. शादी के वक्त लड़के वालों का बढ़िया से आवभगत किया गया. द्वारपूजा होने के बाद जयमाला भी हुआ. फिर अधिकांश लोग खाना खाकर अपने घर चले गए और फेरों की रस्म शुरू हो गई. तभी दुल्हन और परिजनों की नजर डाल के गहने और सामानों पर पड़ी.

