फर्रुखाबाद के कारीगर अपने पूर्वजों की इस विरासत को आज भी जीवित रखे हुए हैं. लोकल18 से बातचीत में कारीगरों ने बताया कि बांसुरी बनाने की कला उन्होंने अपने पुश्तों से सीखी है. Post navigation मिलिट्री कॉलेज से की पढ़ाई, ऐसे पूरा किया सेना में ऑफिसर बनने का सपना कौन थे भुलई भाई, जिनके जाने का दुख पूरी भाजपा को, BJP बनने से पहले से रहा नाता