शीर्षदीप ने बताया कि उन्होंने इस पूरी यात्रा में एक दिन भी पूरी नींद नहीं ली और लगातार चलते रहे. यह ऐतिहासिक यात्रा 15 दिसंबर 2016 से शुरू हुई और 21 दिसंबर को समाप्त हुई. Post navigation चाइनीज के आगे फीके पड़ गए पारंपरिक भोजन, गुड़-चूड़ा पर हावी हो गया फास्ट फूड “किस्मत से हेलमेट मिल सकता है…सुरक्षा नहीं”! झांसी SSP ने कही बड़ी बात