1891 में महज 18 हजार रुपये की लागत से घंटाघर का निर्माण किया गया था. इसमें बलुआ गुलाबी पत्थरों का प्रयोग किया गया है. ऐसी नक्काशी पूर्वांचल के अन्यत्र किसी भवन पर देखने को नहीं मिलेगा. पर्यटकों के लिए हेरिटेज पॉइंट के तौर पर विकसित किया जा रहा है. Post navigation यहां मिलते हैं सबसे स्टाइलिश ब्राइडल लहंगे, मात्र 1000 रुपये कीमत आयुष्मान कार्ड से होगा मोतियाबिंद का ऑपरेशन, चित्रकूट में यहां है सुविधा