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Saharanpur: 28 साल के शेखर ने वकालत की पढ़ाई करने के बाद अपने धर्म को समर्पित करते हुए संन्यास लिया. उन्होंने करोड़ों की संपत्ति छोड़कर शिवानंद महाराज बनकर मां भगवती का मंदिर बनवाया, जो दो साल में तैयार हुआ.

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